दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 10 जून को हीरा कारोबारी मेहुल चाैकसी और 21 अन्य के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में नई चार्जशीट दायर की है। इस चार्जशीट में भगोड़े मेहुल पर सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया गया है। मेहुल पर यह आरोप पहली बार लगाया गया है। एजेंसी की चार्जशीट में दावा किया गया है कि चाैकसी ने पीएनबी के अधिकारियों की मिलीभगत से 2017 में 165 लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) और 58 एफएलसी (फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट) को धोखाधड़ी से जारी किया, जिससे बैंक को ₹6,097 करोड़ ($952 मिलियन) का नुकसान हुआ।

चार्जशीट में कहा गया है, “दिसंबर 2017 में, मेहुल चोकसी ने हांगकांग का दौरा किया और हांगकांग स्थित आपूर्तिकर्ता संस्थाओं (उनके द्वारा नियंत्रित) के डमी निदेशकों से मुलाकात की और उन्हें बताया कि भारत में उनकी कंपनी – गीतांजलि समूह से संबंधित समस्याएं चल रही हैं और वह उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है। इससे पता चलता है कि मेहुल चाैकसी को आपराधिक कार्रवाई के बारे में पहले से जानकारी थी। इसलिए, वह कानून की प्रक्रिया से बचने के लिए 4 जनवरी, 2018 को देश छोड़कर भाग गया।

चार्जशीट में चोकसी के अलावा पीएनबी के सेवानिवृत्त डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी, सिंगल विंडो ऑपरेटर हनुमंत करात, इलाहाबाद बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक उषा अनंतसुब्रमण्यम, पीएनबी के पूर्व कार्यकारी निदेशक केवी ब्रह्माजी राव, बैंक के पूर्व महाप्रबंधक नेहल अहद, चोकसी के गीतांजलि समूह के पूर्व उपाध्यक्ष विपुल चितालिया और संजीव शरण सहित 21 व्यक्तियों और कंपनियों के नाम हैं।

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